अस्पताल में भर्ती देवेंद्र महतो का आंदोलन को लेकर बड़ा बयान, धरनास्थल लौटने की जताई इच्छा
रांची: झारखंड की प्रमुख जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे चर्चित छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने बुधवार को रांची के सदर अस्पताल से डिस्चार्ज होकर वापस अपने आंदोलन स्थल—जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम—लौटने की औपचारिक अनुमति मांगी है। गत 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज और झड़प में घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
सिविल सर्जन को सौंपे गए अपने आवेदन में महतो ने स्पष्ट किया है कि अपने संघर्षरत साथी प्रदर्शनकारियों से दूर रहना उनके लिए शारीरिक चोट की तकलीफ से भी कहीं अधिक मानसिक पीड़ा का कारण बन रहा है। उनके मुताबिक, अस्पताल के बेड पर रहते हुए भी उनका अनिश्चितकालीन अनशन 11वें दिन भी पूरी दृढ़ता के साथ जारी है।
‘मेरा शरीर अस्पताल में है, लेकिन आत्मा सत्याग्रह स्थल पर बसती है’
सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात साझा करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने भावुक अंदाज में कहा कि उनका भौतिक शरीर भले ही अस्पताल के बिस्तर पर उपचार करा रहा हो, लेकिन उनकी आत्मा और संकल्प पूरी तरह उस सत्याग्रह स्थल पर टिके हुए हैं, जहां आज भी हजारों छात्र और युवा अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए संघर्ष के पथ पर डटे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि राज्यभर के युवाओं के इस न्यायपूर्ण और निष्पक्ष संघर्ष से खुद को दूर रखना उनके लिए मानसिक रूप से असंभव सा हो गया है। महतो ने चिकित्सा अधिकारियों से अपील की है कि वे उनकी मानवीय स्थिति पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें और उन्हें तुरंत जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित मुख्य सत्याग्रह स्थल पर लौटने की अनुमति प्रदान करें।
11वें दिन भी अनशन जारी, पूर्ण न्याय मिलने तक रहेगा संघर्ष
चिकित्सा अधिकारियों को दिए अपने हस्तलिखित आवेदन में उन्होंने उल्लेख किया है कि 12 अगस्त 2026 को उनके आमरण अनशन का 11वां दिन है और जब तक झारखंड के युवाओं को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, उनका यह संघर्ष एक पल के लिए भी नहीं रुकेगा। उन्होंने लिखा कि राज्य के कोने-कोने से आए हजारों छात्र अपने हक, अधिकार और भविष्य की रक्षा के लिए उनके साथ खड़े हैं। यह आंदोलन उनके लिए केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि छात्रों के अटूट भरोसे और उम्मीदों के प्रति उनकी नैतिक जिम्मेदारी है।
महतो ने याद दिलाया कि 10 अगस्त को उनके अनशन के नौवें दिन विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा बल प्रयोग, लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया था, जिसके बाद उन्हें जबरन एंबुलेंस से सदर अस्पताल लाया गया था।
साथियों से दूरी शारीरिक कष्ट से ज्यादा मानसिक पीड़ा
छात्र नेता ने कहा कि झारखंड के आम युवा और आंदोलनकारी साथी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में दिन-रात डटकर न्याय की आस में इस आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे कठिन समय में उनसे अलग रहना उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है।
उन्होंने अस्पताल प्रशासन को यह पूरा भरोसा दिलाया है कि यदि उन्हें आंदोलन स्थल पर जाने की अनुमति दी जाती है, तो वह डॉक्टरों द्वारा दी जाने वाली सभी चिकित्सीय सलाह, दवाइयों और जरूरी सावधानियों का पूरी तरह से पालन करेंगे।
10 अगस्त के विधानसभा घेराव के दौरान हुआ था पुलिस बल प्रयोग
गौरतलब है कि गत सोमवार को प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए देवेंद्र नाथ महतो को अस्पताल पहुंचाया था। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के विरोध में अभ्यर्थियों ने विधानसभा घेराव का बड़ा मार्च निकाला था। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज का सहारा लिया था।
आंदोलनकारी छात्र जेएसएससी-सीओएल (JSSC-CGL) परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने, गड़बड़ी की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने और चयन प्रक्रिया में आमूल-चूल सुधार करने की मांग पर अड़े हुए हैं। छात्रों का आरोप है कि सरकार ने अब तक उनकी किसी भी जायज मांग को गंभीरता से पूरा नहीं किया है। प्रशासनिक स्तर पर अनुमति मिलने या न मिलने के बीच छात्र संगठनों ने अपने आंदोलन को और तेज करने के संकेत दिए हैं।

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